हम सब मिलकर करें मौसम की अग्रिम चेतावनी अंतर को समाप्त

प्रस्तावना

जलवायु परिवर्तन के दौर में बाढ़, सूखा, चक्रवात, लू और अन्य चरम मौसमीय घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति हमें समय पर और प्रभावी चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकता का एहसास कराती है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन द्वारा दिए गए “Early Warnings for All” के आह्वान के अनुरूप, यह लेख मौसम की अग्रिम चेतावनी सेवाओं के महत्व, भारत मौसम विज्ञान विभाग की भूमिका तथा समाज के अंतिम व्यक्ति तक समय पर चेतावनी पहुँचाने के प्रयासों पर प्रकाश डालता है। आशा है कि यह लेख पाठकों को मौसम चेतावनी सेवाओं की उपयोगिता और उनके सामाजिक महत्व को समझने में सहायक होगा।



हर साल 23 मार्च को "विश्व मौसम विज्ञान दिवस" के रूप में मनाया जाता है, ताकि 1950 में स्थापित विश्व मौसम विज्ञान संगठन (वर्ल्ड मेट्रोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन : WMO) की स्थापना को याद किया जा सके। वर्ष 2025 के लिए इस दिन का विषय था – “हम सब मिलकर करें अग्रिम चेतावनी अंतर को समाप्त यह विषय इस बात को दर्शाता है कि पूरी दुनिया मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पृथ्वी का हर व्यक्ति ऐसी चेतावनी प्रणालियों से सुरक्षित हो, जो समय पर जान बचाने वाली सूचना दे सकें।

 जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़, सूखा, लू, चक्रवात और जंगल की आग जैसी चरम मौसमी घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता लगातार बढ़ रही है। इन स्थितियों से निपटने में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ (Early Warning Systems - EWS) एक अत्यंत प्रभावी उपाय बन गई हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन की State of the Global Climate 2024 रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग 3.6 अरब जनसंख्यायानी आधी मानवताअभी भी इन चेतावनी प्रणालियों से ठीक तरह से संरक्षित नहीं है। यह स्थिति विशेषकर अफ्रीका, एशिया के कुछ भागों और छोटे द्वीप देशों में अधिक गंभीर है।

 


चित्र १: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) द्वारा जारी किया गया है यह सूचनाचित्रण,  सभी के लिए समय पर मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी सेवाएं सुनिश्चित करने में वैश्विक प्रगति को दर्शाता है।

 

इस चुनौती का सामना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने "Early Warnings for All" (EW4All) पहल की शुरुआत COP27 सम्मेलन में की, जिसका लक्ष्य 2027 तक हर व्यक्ति को चेतावनी से जोड़ना है। यह पहल कई संयुक्त राष्ट्र संस्थाओं (UN) और देशों को साथ लाकर मौसम निगरानी ढांचे, पूर्वानुमान क्षमताओं, संचार प्रणालियों और समुदायों की भागीदारी में निवेश सुनिश्चित कर रही है।

भारत, जो चक्रवातों, बाढ़, लू, सूखे और भूस्खलनों जैसे कई प्रकार के खतरों से प्रभावित होता है, लंबे समय से बहु-खतरे वाली चेतावनी प्रणालियों में निवेश के महत्व को समझता आया है। भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पिछले 150 वर्षों से अग्रिम चेतावनी सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

 IMD ने चक्रवात, भारी वर्षा, लू और ठंड से संबंधित प्रभाव आधारित पूर्वानुमान (impact-based forecasts) जारी करने की प्रणाली विकसित की है। ये पूर्वानुमान केवल घटनाओं की भविष्यवाणी तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके संभावित प्रभावों का आकलन कर कारगर सलाह और सुझाव भी देते हैं। IMD आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, स्थानीय प्रशासन और मीडिया के साथ मिलकर इन सूचनाओं को आम जनता तक पहुंचाने में सक्रिय रूप से कार्य करता है।

चक्रवातों के संबंध में IMD की पूर्व चेतावनी सेवाएं उल्लेखनीय रही हैं। पिछले दो दशकों में चक्रवातों के ट्रैक और तीव्रता की भविष्यवाणी में सटीकता में बड़ा सुधार हुआ है, जिससे अनेक जानें बची हैं। इसी तरह, लू के लिए जारी चेतावनियाँ भी जलवायु परिवर्तन के इस दौर में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई हैं। IMD पूरे भारत के लिए ऋतुकालीन और मासिक लू पूर्वानुमान जारी करता है, जिससे नीतिनिर्माताओं और योजनाकारों को पहले से तैयारी का अवसर मिलता है। इसके साथ साप्ताहिक और प्रतिदिन जिला स्तर पर अगले पाँच-दिनों के पूर्वानुमान भी दिए जाते हैं।

 


चित्र २मौसम की अग्रिम चेतावनी अंतर को समाप्त करने हेतु: लू से तैयारी में IMD की भूमिका ।

 

IMD डिजिटल माध्यमोंमोबाइल ऐप्स, एसएमएस, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप समूह, कम्युनिटी रेडियो और वॉयस मैसेजके ज़रिए अंतिम छोर तक पहुँच बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। किसानों, मछुआरों और शहरी नागरिकों के लिए सरल, बहुभाषी मौसम सूचना तैयार की जा रही है। चेतावनियाँ तभी उपयोगी होती हैं जब वे समय पर कार्रवाई का कारण बनें। इसलिए विश्वसनीय, स्पष्ट और सरल संचार, विशेषकर बुजुर्गों, गरीबों, विकलांगों जैसे कमजोर वर्गों तक पहुँचाना और समुदाय स्तर पर अभ्यास और शिक्षा के ज़रिए तैयारियाँ बढ़ाना जरूरी है।

भारत की इस संयुक्त राष्ट्र पहल में भागीदारी के अंतर्गत IMD का लक्ष्य हैसभी बड़े खतरों के लिए प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान मॉडलों का विस्तार, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों, सामाजिक संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों से सहयोग को बढ़ाना, और कृषि, जल, ऊर्जा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अंतिम उपयोगकर्ताओं के साथ मिलकर सेवाएँ विकसित करना। इसके साथ ही IMD आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को भी अपने पूर्वानुमान तंत्र में शामिल करने की दिशा में कार्य कर रहा है। अधिक अग्रिम सूचना, बेहतर गुणवत्ता और उच्च रेजोल्यूशन वाले पूर्वानुमानों को विकसित करना लक्ष्य है।

जैसे-जैसे भारत जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है, वैसे-वैसे चेतावनी प्रणाली की खाई को पाटने के लिए सरकारों, वैज्ञानिकों और नागरिकों के बीच सहयोग की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैताकि सभी के लिए एक सुरक्षित और सतत भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।

Reference

Ratna, S.B. (2024). हम सब मिलकर करें मौसम की अग्रिम चेतावनी अंतर को समाप्त. किरणें, बारहवाँ संस्करण, सितंबर 2024, जलवायु अनुसंधान एवं सेवाएँ कार्यालय (CRS), भारत मौसम विज्ञान विभाग, पुणे.

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